Sunday, September 22, 2019

Sawan Poem इस बार सावन तो बरसा बहुत पर पहले जैसी मासूमियत नहीं थी

इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी मासूमियत नहीं थी | 

पहले जैसी तेरी हसीं, तेरी ख़ुशी मेरे साथ नहीं थी,
तेरे साथ वाली चाय की प्याली थी, पर वो खुशबु नहीं थी,
इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी मासूमियत नहीं थी |

पिछले तेरे साथ के सारे सावन के पन्ने गुजरे आँखो से, बस में खामोश सी सुन रही थी|
पहले जैसी मासूमियत नहीं थी , पहले जैसी तेरी नादानगी नहीं थी
इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी रिमझिम पुकार नहीं थी

इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी दीवानगी नहीं थी |
इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी मासूमियत नहीं थी |

इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी कायनात नहीं थी |
इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी चाँद की चांदनी नहीं थी |
इस बार सावन तो बरसा बहुत, पर पहले जैसी कोई बात नहीं थी | 

गम सावन का नहीं क्यों की सावन फिर बरसेगा, तेरी यादे तेरी जगह हर सावन में वफ़ा करती है, बस यही फर्क था,
मनता है सावन हर बार पर खयालो में तेरे साथ, वो गाने भी थे जो सुनते थे साथ, पर तेरी आवाज नहीं थी साथ, 

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